UA-155293559-1Akbar Birbal Story in Hindi (अकबर बिरबल की कहानियाँ ) Top 100 Kids Story

Akbar Birbal Story in Hindi (अकबर बिरबल की कहानियाँ ) Top 100 Kids Story

Akbar Birbal Story In Hindi

सोने का खेत

एक दिन महाराज अकबर के कमरे में एक नौकर महाराज अकबर का कीमती फूलदान साफ़ कर रहा था | लेकिन तभी गलती से वह फूलदान टूट गया | नौकर कहने लगा है भगवान् ये तो जहापनाह का पसंदीदा फूलदान था वो मुझे जरूर सजा देंगे अब में क्या करू ? ओर नौकर उस टूटे हुए फूलदान को बाहर लेकर चला जाता है,

तभी महाराज अकबर अपने कमरे में आते है ओर देखते है की उनका फूलदान कमरे में नहीं है, वे तुरंत सिपाही को बुलाते है ओर कहते है हमारा फूलदान कहाँ गया है | कही वो फिर से तो नहीं खो गया |


सिपाही :- हुजूर ! जब मैने नौकर को अंदर सफाई करने के लिए भेजा था तब तो यही था हुजूर, में अभी उससे पूछता हूँ |


अकबर :- हां उसे फ़ौरन यहाँ बुलाओ |
सिपाही :- जी हुजूर ,थोड़ी देर बाद सिपाही उस नौकर को लेकर आ जाते है |
अकबर :- फूलदान कहा गया आखिर कहा है वो ?
नौकर डरते हुए जहापनाह में उसे साफ़ करने ले बाहर ले गया था |


अकबर :- सफाई के लिए ? उसके लिए उसे यहाँ से ले जाने की क्या जरुरत थी | जाओ उसे फ़ौरन वापस लाओ |
नौकर :- हुजूर मुझे माफ़ कर दीजिये हुजुर ! दरअसल सफाई करते हुए गलती से टूट गया वो |
अकबर :- टूट गया | मगर अभी तो तुमने कहा की तुम उसे साफ़ करने ले गए हो ? गलती से गिराने की वजह से तुम्हे माफ़ कर देते , लेकिन झूठ बोलने की सजा देंगे हमे झूठ से सख्त नफरत है, दफा हो जाओ हमारी सल्तनत से ! सिपाहियों ले जाओ इसे यहाँ से |


नौकर :- हुजूर – हुजूर मुझे माफ़ कर दीजिये, हुजूर – हुजूर मुझसे गलती हो गयी, हुजूर में डर गया था हुजूर, मुझे माफ़ कर दीजिये हुजुर |
और अगले दिन अकबर का दरबार लगता है और अकबर सारी कहानी वहाँ पर सुनाते है और कहते है इस तरह हमने उसे देश निकाला की सजा दी, किसी भी झूठे को हम कभी माफ़ नहीं कर सकते है |हमे हमेशा सच बोलना चाहिए |


और फिर सभी दरबारी कहने लग जाते है – आपने बहुत अच्छा किया हुजूर कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए | सच्चाई सब से बेहतर है |
अकबर :- हां यकीनन क्या आप में से कभी किसी ने झूठ बोला है क्या ?
सभी दरबारी कहते है – नहीं जहापनाह हो ही नहीं सकता हमने कभी झूठ नहीं बोला है जहापनाह ! नहीं नहीं नहीं नहीं हमे तो झूठ बोलना भी नहीं आता हुजूर


अकबर :- बीरबल तुम क्या कहते हो तुमने कभी झूठ बोला है ?
बीरबल :- मैने कभी न कभी तो झूठ बोला है जहापनाह |
अकबर :- तुम्हारा मतलब हमारे दरबार में नौरत्नों में से एक रतन झूठा है ?
बिरबल :- लेकिन हुजूर हमने कभी न कभी तो झूठ बोलना ही पड़ता है | मुझे यकीन है की हर कोई झूठ कभी न कभी तो झूठ बोला ही होगा |


अकबर :- नहीं हमे नहीं लगता की किसी को भी किसी भी हालत में झूठ बोलने की जरुरत है, ओर हम ये कतई बर्दाश नहीं कर सकते की हमारे दरबार का खास मंत्री एक झूठा इंसान हो |
बिरबल :- लेकिन हुजूर ?


अकबर :- नहीं नहीं नहीं अब हम कुछ नहीं सुनना चाहते है | हमारे उसूल सबके लिए बराबर है | इसीलिये तुम हमारे दरबार में मंत्री नहीं रह सकते हो बीरबल | हमे झूठ से सख्त नफरत है | हम तुम्हे अपने दरबार से अभी निकालते है, चले जाओ यहाँ से ओर कभी अपनी सूरत मत दिखाना |
बिरबल :- जैसी आपकी मरजी हुजूर |

और बिरबल दरबार से चला जाता है | घर जाकर बिरबल सोचने लगता है ओर अपने सेवक राम को बुलाता है |
सेवक राम :- जी हुजूर कहिये में क्या कर सकता हूँ ?


बिरबल :- बाजार जाकर मेरे लिए सबसे अच्छा सुनार ढूंढो ओर ये गेहू डाली लेकर जाओ ओर उसे कहो की बिलकुल ऐसे ही डाली मेरे लिए बनाये | पुरी डाल से लेकर गेहू के दानो तक एक जैसी होनी चाहिए सेवक राम |तो जाकर एक बढ़िया सुनार ढूंढ कर उससे ये काम करवाओ |
सेवक राम शहर जाकर यह काम करवाकर ला देते है |और बिरबल को दे देते है |

कुछ दिनों बाद महाराज अकबर के दरबार में बिरबल आते है |
अकबर :- बिरबल हमने तुम्हे अपने दरबार से निकाल कर कहा था की कभी अपनी सूरत नहीं दिखाना | पर तुमने हमारे हुकम की तालीम क्यों नहीं की ?
बिरबल :- हुजूर मुझे माफ़ करे, में आपके हुकुम की नाफरमानी नहीं करना चाहता था |
अकबर :- तो यहाँ क्यों आये हो ?
बिरबल :- हुजूर आपने मुझे दरबार में आने से मना किया हो, फिर भी में इस राज्य का वफादार नागरिक हूँ, मुझे एक ऐसी चीज मिली है, जो इस सल्तनत को पूरी दुनिया में अमीर बना देगी इसीलिए सोचा आकर आपको दिखा दू |


अकबर :- सचमुच ऐसी क्या चीज है ? जो हमारी सल्तनत को पूरी दुनिया से ज्यादा अमीर बना देगी | दिखाओ हमें |
बिरबल अकबर को वो गेहू की बाल दिखाता है |
अकबर :- ये तो असली सोना है |
बिरबल :- जी हुजूर ये बिलकुल असली सोना है |
अकबर :- मगर इसका क्या मतलब है ? ओर इसका करना क्या चाहिए ?
बिरबल :- हुजूर ये सोने की डाली मुझे ज्योतिषी ने दी थी, जो बरसो की तपस्या के बाद हिमालय पर्वत से लोटे थे और ये उन्हें भगवान से मिला था | उन्होंने कहा की हम इसे सबसे उपजाऊ जमींन पर बोयेंगे तो सोने की खेती कर सकते है |


अकबर :- बीरबल क्या तुम्हे यकीन है |
बिरबल :- हुजूर वे ज्योतिष कोई आम आदमी नहीं थे, मुझे तालाब के पास ये डाली दे कर वो तालाब के उस पार पानी पर चल कर पार कर गए |
अकबर :- क्या पानी पर चलकर गए ? ये कैसे हो सकता है |
बिरबल :- जी हुजूर मुझे भी अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ पर उन्होंने ऐसा ही किया जैसे हम सभी जमींन पर चलते है वो पानी पर चलकर तालाब पार कर गये हुजुर |


अकबर :- खैर बिरबल अब वक्त जाया मत करो और अब जल्दी से उपजाऊ जमींन ढूंढ़कर इस बाली को वहा बो दो |
बिरबल :- हुजूर मेने पहले ही ये काम कर दिया है ,ओर एक जमींन भी ढूंढ ली है, में अभी आपको वहा ले जा सकता हूँ |


अकबर :- ठीक है हम कल ही इस बाली को बोयेंगे | कल सुबह हम चलेंगे | ओर भी सभी को बता देना जिससे वे सभी सोने की बुआई को देख सके |
अगले दिन अकबर ओर बीरबल उस जगह पर जाते है |ओर वह सारे गांव वाले भी आ जाते है, बिलकुल सुनसान जगह पर बिरबल ले जाकर कहते है ! हुजूर यही वो जगह है |


अकबर :- तो देर किस बात की है बाली को बो दो |
बिरबल :- नहीं हुजूर में ये डाली नहीं बो सकता हूँ |
अकबर :- नहीं बो सकते ? क्या मतलब तुम नहीं बो सकते ?
बिरबल :- हुजूर सिर्फ वही इसकी बुआई कर सकता है जिसने कभी झूठ नहीं बोला है | अगर कोई झूठा इसे बोयेगा तो सोने की डाली नहीं उगेगी | ओर जैसा मैंने कहा है – मेने जीवन में कई बार झूठ बोलै है |


अकबर :- ठीक है तो फिर आप में से कोई आगे आकर इस बाली को बोइये |
सभी अपना सर झुका लेते है क्योकि सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी झूठ बोला ही है |
अकबर :- हमरे यकीन नहीं होता की हमारे पास एक भी ऐसा आदमी नहीं जिसने झूठ नहीं बोला हो ?
बिरबल :- हुजूर मुझे लगता है की सिर्फ आप ही इसकी बोआई कर सकते है , सिर्फ आप ही |
अकबर सोच में पड़ जाते है |


बिरबल :- हुजूर अब सिर्फ आप ही है, जिसने कभी झूठ नहीं बोला है – तो क्यों नहीं आप ही इस डाली को बो दे |
अकबर :- हमने भी बचपन में कभी झूठ बोले होंगे | इसीलिए हमे नहीं लगता की हम इसे बोने के काबिल है |

बिरबल :- हुजूर में झूठ बोल रहा था | ये सोने की डाली जादुई नहीं है और न ही ये मुझे किसी ज्योतिष ने दी थी |इससे मेने शहर के एक जोहरी से बनवाई है जी हुजूर अब आप समझ गए होंगे की हर किसी न किसी को कभी न कभी झूठ बोलना ही पड़ता है कभी सच्चाई छुपाने या धोका देने को नहीं बल्कि इसलिए की किसी का दिल न दुखे या शर्मिंदा ना होना पड़े या और किसी अच्छे कारण के लिए |

अकबर :- हम समझ गये बिरबल ओर सच बोलने पर तुम्हे सजा देने के लिए हम तुमसे माफ़ी चाहते है | ओर बिना डरे हमें हमारी गलती का अहसास कराने के लिए हम तुहारा सुकरगुजार है | तुम हमारे सच्चे दोस्त हो बिरबल, शुक्रिया बहुत बहुत शुक्रिया बिरबल !


बिरबल :- शुक्रिया हुजूर ! इस इज्जत – अफजाई के लिए शुक्रिया हुजूर |
और अगले दिन बादशाह उस नौकर को अपने राज्य में वापस बुला लेते है |

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