UA-155293559-1Akbar birbal story hindi ( top 100 Akbar birbal story hindi language me)

Akbar birbal story hindi ( top 100 Akbar birbal story hindi language me)

ईमानदारी

Akbar Birbal Story Hindi

ऐक दिन अकबर और बिरबल आपस में बाते कर रहें थे, अकबर :- बिरबल मुझे लगता हैं की हमारे राज्य में सभी लोग बहुत ईमानदार हैं,
बिरबल :- कह नहीं सकते जहापनाह आजकल लोग पहले जैसे नहीं रहें,
अकबर :- पर तुम ये कैसे कह सकते हो,
बिरबल :- ठीक हैं महाराज कल में आपको प्रमाणित कर के दिखा दूंगा

अगले दिन बीरबल ने ऐक घोसना की, सुनो- सुनो सभी को महाराज की आज्ञा हैं की कल मंदिर के सामने रखे हंडे सभी को ऐक सेर दूध डालना हैं, ये महाराज की आज्ञा हैं|

अगले दिन सभी लोगो ने आकर हंडे में दूध डाला, शाम को जब अकबर और बीरबल मंदिर गए तो देखा की हंडे में तो दूध की जगह सिर्फ पानी ही था,

बिरबल ने कहा- देखा महाराज?
हर आदमी ये यही सोचा की इतने बड़े हांडे में अगर ऐक शेर पानी डाले तो किसी के समझ में ये नहीं आएगा की किसने पानी डाला, यही विचार करके हर किसी ने हांडे में दूध की जगह पानी डाला महाराज,

अकबर :- बिरबल कल तुमने जो कहा वो सही हैं, आजकल हमारे राज्ये में प्रजा इतनी ईमानदार नहीं रही |

हवामहल

Akbar Birbal Story Hindi

ऐक दिन महाराज अकबर के मन में ऐक विचार आया उसने अपनी बात अपने सारे मंत्री को बताई की हम ऐक ऐसा महल बनाना चाहते है की वो महल हवा में रहना चाहिए आप लोग बताये की यह कैसे किया जा सकता हैं,

सभी सोच में पड़ गए की क्या कहा जाये, और क्या किया जाये?

तभी वहां पर बिरबल का आगमन हुआ महाराज अकबर ने बीरबल को अपनी बात बताई, अकबर की किसी भी बात को बिरबल ना नहीं करता था,

बिरबल :- महाराज इस में तो कोई बड़ी बात नहीं हैं, परन्तु इसके लिए तो बहुत सारा धन चाहिए और बहुत सारा समय भी,

अकबर :- कोई बात नहीं बिरबल तुम काम कल से ही शुरू कर दो

अगले दिन बिरबल ने अपने नौकर को 100 तोते लाने को कहा, और उसने उसे अपनी बेटी को दे दिया और कहा की बेटी तुम्हे इसे बोलना सिखाना होगा, जैसे की पानी लेकर आओ- पत्थर लाओ – जल्दी करो ठीक से काम करो |
उसने अपने पिता की बात मान ली, और 6 महीनो तक तोतो को सिखाती रही,

ऐक दिन अकबर को हवामहल की बात याद आयी तुरंत महाराज ने बिरबल को बुलाने की आज्ञा दी, बिरबल हमारे हवामहल का क्या हुआ काम की क्या खबर हैं,

बिरबल :- महाराज काम तो बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा हैं ,
महाराज :- बहुत बढ़िया हम उसे देखने चाहते हैं,
बिरबल :- जरूर महाराज हम कल चलेंगे,

अगले दिन बीरबल ने बहुत बड़े बंद जगह पर उन तोतो को खुला छोड़ दिया
अकबर जब उस जगह पर आया तो उसे बहुत आश्चर्य लगा,
तोते बोलने लगे पानी लाओ- पत्थर लाओ- जल्दी काम करो
यही बात कहते हुए तोते इधर उधर उड़ रहें थे |

अकबर को ये सब देखकर बड़ा आश्रय हुआ फिर उसने बीरबल से पूछा ये सब क्या हैं बिरबल महल कहा हैं,
बिरबल :- महाराज ये महल तो हवा में बन रहा हैं और हवा से बन रहा हैं इसीलिए आप उसे बनते हुए देख नहीं सकते हैं |


अकबर:- हां हां हां …… मान गए तुम्हे बिरबल! तुम बहुत ही ज्यादा बुद्धिमान हो तुम्हारा तो कोई जवाब ही नहीं हैं

अभागि व्यक्ति

Akbar Birbal Story Hindi


महाराज अकबर के राज्य में एक अभागि व्यक्ति था लोगो का कहना था की सुबह सुबह अगर उसका मुँह देख ले तो पूरा दिन ख़राब हो जाता है, यह बात महाराज अकबर को मालूम पड़ता है तभी महाराज कहते है उसे यहाँ लेकर आओ हम उसे देखना चाहते है, उस आदमी को लाया गया अकबर दरबार में अकेला उस आदमी से मिलने के लिए गया और उस आदमी मुँह देखा, उसका मुँह देख़ने के बाद वह जब अपनी बेगम के महल में जा रहा था तभी वह एक सैनिक आ गया और कहा महाराज बेगम साहिबा बेहोश हो गई है,

अकबर ने सोचा अरे ये क्या हुआ? उसे अभी देखा है और ये कैसे हो गया थोड़ी देर बाद अकबर खाना खाने के बैठा, लेकिन तभी उसके पेट में दर्द हो गया और वो खाना भी नहीं खा सका महाराज ने सोचा वह व्यक्ति सही में अभागि है अकबर ने उस आदमी को सूली पे चढ़ा देने का आदेश दिया |

ये खबर सुनकर उस व्यक्ति को बहुत दुःख हुआ |

तभी उसने बिरबल को आते देखा बिरबल को देखते ही उसे संकट से मुक्त होने कि आशा जागी उसने बिरबल को प्रणाम किया और उसे सारी कहानी सुनाई!

बिरबल ने कहा तुम चिंता मत करो में तुम्हारी मदद जरूर करूँगा ,और बिरबल ने उसके कान में कुछ कहा,
अगले दिन उस आदमी को सूली पर चढ़ाने से पहले उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई

और उस आदमी से अपनी अंतिम इच्छा पूरा करने के लिए अकबर से मिलने की गुहार की |

जब महराज आये तब उसने कहा महाराज आखिर मुझे किस गुनाह की सजा मिल रही है,

महराज ने कहा, हमने तुम्हारे बारे में सुना है और आज देख भी लिया तुम बहुत अभागि हो, तुहारी वजह से किसी को दुःख नहीं भोगना पड़ेगा इसलिए तुम्हे ये सजा दी जा रही है|

तब उसने कहा कृप्या मुझे माफ़ करे महाराज मेरा मुँह देख़ने पर आपको सिर्फ भोजन नहीं मिला और मेरा दुर्भग्य देखिये कल मैने सबसे पहले आपका मुँह देखा और मुझे मौत की सजा मिल रही है, ये कैसा न्याय है महाराज !
उसकी बात अकबर के समझ आ गयी उसने उसे जाने दिया और बहुत सारा धन भी दिया और उससे पूछा की ऐसी बात कहने की सलाह तुम्हे किसने दी

महाराज ये सलाह बिरबल ने मुझे दी जो ये नहीं चाहते ही उनके महाराज से कोई भी गलती हो |
तब से अकबर को बिरबल पर बहुत गर्व महसूस हुआ और बिरबल और भी ज्यादा मशहूर हुआ |

मात्रभाषा

Akbar Birbal Story Hindi

एक दिन अनेक भाषा जानने वाला एक पंडित महाराज अकबर के दरबार में आया महाराज ने उसका स्वागत किया और कहा है! विद्यवान आप से मिल कर हमे बहुत अच्छा लगा, आप हमारे साथ रह कर हमरा मान बढ़ाइए !

पंडित ने उनकी बात मान ली और कहा जैसी आपकी मर्जी महाराज
अकबर पंडितजी की मात्रभाषा कौनसी है जानना चाहते थे इसीलिये अकबर कहते है की है विद्यवान पंडित आपकी मात्रभाषा कौनसी है,

पंडित जी कहते है महाराज संसार के सभी भाषा मुझे अपनी मात्रभाषा ही लगती है,

महराज अकबर उस पंडित की मात्रभाषा जानने को उत्सुक हो गए इस बारे में अकबर ने बिरबल की सलाह ली,
बिरबल ने कहा महाराज अगर आपको उसकी मात्रभाषा जाननी है तो आज रात को आपको मेरे साथ चलना होगा, आधी रात को अकबर और बिरबल पंडितजी के कक्ष की और निकले पंडित गहरी नींद में था!

बिरबल ने अचानक उसे मारना शुरू किया, डर में मारे पंडित भोखला गया और कहा है – आ- आई – ग- मेलो – मेलो
बिरबल ने कहा देखा महराज वो पंडित मराठी में चिल्लाया और यही उसकी मात्रभाषा है, हम मनुष्य कितनी भी भाषा सिख ले, परन्तु संकट और आष्चर्य की सिथति में सिर्फ अपनी मातृभषा में ही बोलते है !

बिरबल :- पंडितजी आपको मारने के लिए मुझे क्षमा करे!

जादू की छड़ी

Akbar Birbal Story Hindi

एक दिन बिरबल के पास एक आदमी अपनी समस्या लेकर आया और कहा महाराज मेरे सारे पैसे और गहने चोरी हो गए है, और अब आप केवल मेरी मदद कर सकते है

बिरबल कहते है – तुम्हे किसे पर शक है,
वह आदमी कहता है महाराज शायद मेरे घर का नौकर हो सकता है,

दूसरे दिन बिरबल ने सारे नौकर को बुलाया और सभी के हाथो में एक- एक छड़ी दे दी और कहा ये छड़िया जादू की है और सभी को एक – एक दूंगा और जिसने भी चोरी की है ,उसकी छड़ी कल आधी इंच बड़ी हो जाएगी | और सारे नोकरो को अलग अलग कमरों में रखा गया !

दूसरे दिन सुबह बीरबल ने सभी छडियो की जाँच की तो उसमे से एक छड़ी आधा इंच छोटी थी, उस नौकर को आगे बुलाया गया और बिरबल ने कहा चोरी तुमने ही की है अपना गुनाह कबूल करो !

नौकर ने कहा :- हां महाराज मुझे क्षमा कीजिये में अपनी गलती मानता हूँ |
तब उस सेठ ने पूछा महारज अपने कैसे पहचान लिया !

तब बिरबल ने कहा ! ये छड़ी जादू की नहीं है और आधा इंच बढ़ने वाली भी नहीं है और जिसने चोरी की थी उसे ये डर था की ये छड़ी आधा इंच बढ़ेगी इसीलिए उसने इसे आधा इंच काट दिया और मुझे पता चल गया की वही आदमी असली चोर है |

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