UA-155293559-1Akbar Birbal Story in Hindi (अकबर बिरबल की कहानियाँ ) Top 100 Story

Akbar Birbal Story in Hindi (अकबर बिरबल की कहानियाँ ) Top 100 Story

चालाक बिरबल

Akbar Birbal Story in Hindi

महाराज अकबर का दरबार लगा हुआ होता है, तभी एक आदमी वहा आता है और कहता है महाराज मेरा नाम बटुकर है, और में गहने का कारोबारी हूँ , परसो रात मेने अपना सारा का सारा पैसा चमड़े की थैली में रख दिया और अलमारी में रख दिया ,लेकिन कल सुबह वह से गायब था हुजूर |
अकबर :- ऐसी बात है फिर !


बटुकर :- हुजूर मेरे घर में चार नौकर है, मुझे लगता है की वो थैली उन में से ही किसी ने चुराई होगी लेकिन जब मेने पूछा तो उन्होंने कहा की उन्हें मालूम ही नहीं है सच पूछने के लिए उन्हें मारु और गुनेहगार का पता लगाउ तो मुझे गुनेहगार तो मिल जायेगा | लेकिन बाकी तीन नौकर नौकरी छोड़ देंगे और में ये नहीं चाहता हूँ महाराज आप किसी तरह पता लगाए हुजूर ! में आपका सुकरगुजार रहुंगा |

अकबर :- देखो किसी को सजा दिए बिना सच का पता लगाना बहुत मुश्किल है, लेकिन तुम चाहते हो की हम सच का पता लगाए तो हम जरूर करेंगे तो तुम अपनी चारो नौकर को कल दरबार में लेकर आना और फिर हम इस मसले को सुलझा लेंगे | बटुकर :- जी हुजूर |
और अगले दिन वह वयापारी चारो नौकर को लेकर दरबार में आते है |


अकबर :- तो ये है वो ! बिरबल जी हुजूर में इस मामले को सुलझाने के लिए तैयार हूँ और उसके लिए में इस्तेमाल करूँगा अपनी जादुई शक्तयो को |

अकबर :- जादुई शक्तिया
बिरबल :- जी हुजूर, महाराज इन छडियो में है जादुई शक्तिया | अब इन चारो को एक – एक छड़ी दूंगा हुजूर | जिसने भी चोरी की है उसकी छड़ी कल सुबह तक चार इंच बढ़ जाएगी और हमे पता चल जाएग मुझे लगता है ,इस तरह हम गुनहगार तक आसानी से पहुंच जायेंगे |


अकबर :- ये तरीका तो सही लग रहा है, थी है जो ठीक लगे करो |
बिरबल चारो को एक – एक छड़ी दे देता है और कहता है आज रात को सोते समय अपने पास ही रखना और कल सुबह इसे अपने साथ दरबार में लेकर आना |
जिस नौकर ने पैसे चुराए थी उसे नींद नहीं आ रही थी उसने अपनी छड़ी चार इंच काट दिया और अगले दिन सभी दरबार में आते है |


बिरबल ने चारो से बारी – बारी से छड़ी ली और एक एक को जाने के लिए कहने लगा | उसने देखा की अंतिम नौकर के पास जो छड़ी है वो चार इंच छोटी हो गयी थी क्योंकी उसने उस छड़ी को चार इंच काट दिया था | बिरबल ने कहा तुम नहीं जा सकते हो नाम क्या है तुम्हारा – जी बरकत हुजूर

बिरबल :- तो बरकत जो पैसे तुमने चुराए वो इन्हे वापस कर दो |
बरकत :- हुजूर ये क्या कह रहे है आप पैसे मेने नहीं लिए |
बिरबल :- नहीं लिया तो ये क्या है, बिरबल उसे वो छड़ी दिखाता है जो छोटी हो गयी थी |
अकबर :- ये सब क्या हो रहा है बिरबल हमे कुछ समझ में नहीं आ रहा है हमे तो कोई जादू की छड़ी नहीं दिखाई दे रही है


बिरबल :- जी हुजूर जो ये चार छड़ी मेने इन सभी को दी थी वो कोई जादुई छड़ी नहीं थी वो सभी तो आम छड़ी थी | इसने सोचा की कही ये छड़ी चार इंच बड़ी ना हो जाये इसीलिए इसने इस छड़ी को चार इंच काट दिया अगर इसने चोरी नहीं की तो इसने छड़ी को क्यों काटा ? क्यों बरकत अपनी गलती मानते हो |
बरकत :- माफ़ कीजिये महाराज मैने ही पैसे चुराए थे | इनके पैसे में आज ही लोटा दूंगा, मुझे छोड़ दीजिये में परिवार वाला हूँ |


अकबर :- हां हआ हां बहुत खूब बिरबल, शाबास बिरबल तुम्हारी चालाकी और समझदारी का कोई जवाब नहीं है |

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