UA-155293559-1Akbar Birbal Story in Hindi (Top 100 Kids Akbar birbal story in hindi )

Akbar Birbal Story in Hindi (Top 100 Kids Akbar birbal story in hindi )

Akbar Birbal Story in Hindi (अकबर बिरबल की कहानियाँ

आगरा शहर में दो महाजन हुआ करते थे | उनमे से एक का नाम नेकीराम था वो एक सीधा – साधा शरीफ आदमी था, जो कभी भी अपने ग्राहकों से बेईमानी नहीं करता था ओर लोन से ज्यादा ब्याज कभी नहीं लेता था तथा वह कभी किसी की मदद करने से पीछे नहीं हटता था | Akbar Birbal Story in Hindi

दूसरे का नाम बद्रीराम था | वह हमेशा ग्राहकों से बेईमानी करने की सोचता था, और लोन का ब्याज भी ज्यादा मांगता था, बद्रीराम का ग्राहक पूरी जिंदगी उसका उधार चुकाने में बिता देता था |

एक दिन नेकीराम का मित्र आता है :- नमस्ते मित्र कमल, तुम्हे देखकर बड़ी ख़ुशी हुई आओ बैठो !
कमल :- मित्र मुझे पैसो की बड़ी जरुरत है, मुझे अपने व्यापार में लगाने के लिए पांच सो अशर्फिया चाहिए और में ये पैसे छै महीने में वापस लोटा दूंगा |


नेकीराम :- अच्छा ! में काश तुम्हारी मदद कर सकता | क्या तुम शाम तक रुक सकते हो? आज कुछ लोग मुझे मेरे पैसे लौटाने वाले है, में शाम तक तुम्हे पैसे दे सकता हूँ |
कमल :- लेकिन मुझे पैसे की आज ही जरुरत है |
नेकीराम :- ठीक है मित्र ! तुम शाम को आकर पैसे ले जाना |
शाम को वह आदमी वापस आता हे और पैसे मांगता है |

Akbar Birbal Story in Hindi
नेकीराम :- मित्र क्या तीन सो असर्फियो से तुहारा काम बन जायेगा, में सिर्फ इतने का ही इंतजाम कर पाया हूँ, बाकी की असर्फिया में तुहे अगले हफ्ते तक दे दूंगा |
कमल :- लेकिन देखिए मुझे आज रात में ही जयपुर के लिए रवाना होना है,अगर पैसे नहीं मिले तो में बर्बाद हो जाऊंगा मेरा सब कुछ दांव पर लगा है | कृपया मित्र मेरी मदद करे |


नेकीराम :- कुछ सोचते हुए कहता हे ठीक हैं, हां बद्रीराम बगल में ही हैं , में उसे काफी सालों से जानता हूँ, वो भी एक महाजन हैं, में तुहारे लिये उससे बात कर लेता हूँ और पैसे उधार ले लेता हूँ | ओर नेकीराम बद्रीराम के पास जाता हैं ओर कहता हैं बद्रीराम – मेरा मित्र कमल जयपुर जाना चाहता है, में उसे बचपन से जानता हूँ उसे पैसे की सख्त जरुरत है मुझे दो सो सोने की असर्फियो की जरुरत है, ये रकम में छे महीने में वापस लोटा दूंगा |

Akbar birbal story in hindi
बद्रीराम :- ठीक हे नेकीराम में तुहे जानता हु, में तुम्हे ये उधार दूंगा पर मेरी दो शर्त है, एक इस रकम पे पचास असर्फियो का ब्याज लगेगा और दूसरी ये अगर तुमने छे महीनो में ये पूरी रकम नहीं लोटा सके तो तुम्हे मुझे अपने जिस्म का एक शेर मॉस देना होगा |


नेकीराम :- मेरे जिस्म का एक शेर मॉस ओह ! ठीक है, मेरे मित्र को इस रकम की सख्त जरुरत है इसीलिए में इस शर्त को मान लेता हूँ क्योकि मुझे यकीन हे की मेरा मित्र मुझे धोखा नहीं देगा और मेरे पैसे जरूर लौटाएगा और में तुहारी इस शर्त से बच पाऊंगा और बद्रीराम उसे दो सो सोने की असर्फिया दे देता है, और कहता लेकिन याद रखना अगर तुमने छटे महीने में मेरे पैसे नहीं लौटाए तो तुम्हे मुझे अपने जिस्म का एक शेर मॉस देना होगा |


और अगले दिन नेकीराम अपने मित्र कमल को पैसे दे देता हे और कहता है – कमल अब मेरी जिंदगी तुहारे हाथो में हे मित्र कैसे भी करके ये रकम छे महीने में लोटा देना |
कमल :- हे भगवन बद्रीराम बड़ा ज़ालिम आदमी है घबराओ नहीं नेकीराम में ये पैसे छे महीने में लोटा दूंगा तुम एक सच्चे मित्र हो | बहुत बहुत धन्यवाद | लेकिन में तुहारा ये एहसान कभी नहीं भूलूंगा अब में चलता हूँ मेरे मित्र |


छे महीने बाद
बद्रीराम :- नेकीराम तुहारे छे महीने पुरे हो गए है कहा हे मेरे पैसे !
नेकीराम :- बद्रीराम मेरे मित्र में खुद कमल का इन्तजार कर रहा हूँ वो अभी तक लोटा नहीं,लेकिन मुझे यकीन हे की वो मुझे निराश नहीं करेगा और शाम से पहले जरूर लोट आएगा | में तुम्हारे पैसे तुम्हे सूरज ढलने से पहले लोटा दूंगा |


बद्रीराम :- खैर अब तुहारे पास शाम तक का समय है, अगर शाम तक मुझे मेरे पैसे नहीं मिले तो तुम्हे याद हे न तुम्हे मुझे अपने जिस्म का एक शेर मॉस देना होगा |
नेकीराम :- बद्रीराम तुम्हे तुम्हारे पैसे मिल जायेंगे मेरा मित्र मुझे निराश नहीं करेगा |
बद्रीराम वह से चला जाता हे |


नेकीराम अपने मित्र का इन्तजार करने लग जाता हे | लेकिन शाम तक भी उसका मित्र वापस नहीं आता है और बद्रीराम वापस उसके घर आ जाता हे और कहता हे नेकीराम कहा हो तुम |
नेकीराम कहता हे – बद्रीराम अभी में तुम्हे ही मिलने आ रहा था | कमल अब तक लोटा नहीं, जरूर कोई समस्या हो गयी होगी, वो एक दो दिन में जरूर लौटेगा नहीं तो में खुद जयपुर जाकर उसका पता लगाऊंगा मुझे कुछ दिन की मौहलत देदो |


बद्रीराम :- नहीं बिलकुल नहीं ! अब तुम्हे और मौहलत नहीं दे सकता या तो तुम मुझे मेरे पैसे लौटाओ नहीं तो शर्त के मुताबित अपने अपने जिस्म का एक शेर मॉस मुझे दो |
नेकीराम :- बद्रीराम मुझ पर रहम करो अगर तुम मेरे जिस्म का ऐक शेर का मॉस कटोगे तो में मर जाऊंगा | में तुम्हारे पैसे जल्द ही लोटा दूंगा, मुझे थोड़ी से मौहलत और दे दो |

बद्रीराम :- अब कोई फ़ायदा नहीं या तो पैसे दो या फिर अपने जिस्म का एक शेर मॉस दो |
तभी वहाँ से बीरबल गुजरते है और पूछते हे – ये क्या हो रहा है? यहाँ ये क्या समस्या है ?
बद्रीराम :- मुझे इजाज़त दीजिये हुजूर ! इस आदमी ने मुझ से उधार लिया और अब न तो ये उधार लोटा रहा है और न ही शर्त के मुताबिक पैसे न लौटने पर अपने जिस्म का एक शेर मॉस मुझे दे रहा है |
बीरबल आश्रय होकर नेकीराम से पूछता हे क्या ये सच बोल रहा हे ?


नेकीराम :- जी हुजूर ये सच है, मेने उधार लिया था | लेकिन मेरा मित्र अभी जयपुर से लोटा नहीं है, लेकिन मुझे यकीन हे की मेरा मित्र जरूर आएगा बस मुझे थोड़ी से मौहलत और चाहिए हुजूर |
बिरबल :- तुम इसे थोड़ी सी मौहलत क्यों नहीं देते इसे भी अपने ब्याज में जोड़ लेना |
बद्रीराम :- नही हुजूर ! में ऐसा नहीं कर सकता या तो ये मुझे मेरे पैसे लौटाए नहीं तो अपने जिस्म का एक शेर मॉस दे |


नहीं नहीं ये आदमी तो एक जालिम हे नेकीराम तो एक भला आदमी है और उसे थोड़ा सा समय मिलना चाहिए
बीरबल :- खामोश तुम दोनों मेरे साथ अभी दरबार चलो |कल सुबह जहापनाह अकबर खुद इसका फैसला करेंगे |
और सभी दरबार चले जाते हे और अगले दिन दरबार में बादशाह अकबर आते है, और बीरबल महाराज अकबर को पूरी कहानी सुनाते है और कहते हे इसीलिए इन्हे में यहाँ ले आया हुजूर !
अकबर :- बीरबल अब तुम ही ये मामला सुलझाओ !
बीरबल :- ठीक है हुजूर |


तभी दरबार में नेकीराम का मित्र कमल आ जाता है और कहता है – महाराज इस सब की वजह में हूँ, मुझे ही पैसे देने के लिए नेकीराम ने बद्रीराम से पैसे उधार लिए थे | मुझे शहर से आने में थोड़ी देर हो गयी और अब में बद्रीराम के पुरे पैसे लेकर वापस आ गया हूँ हुजूर |
अकबर :- बद्रीराम तुम्हे तुम्हारे पैसे वापस मिल गए तो मेरे ख्याल से मसला अभी सुलह हो गया हैं |
बद्रीराम :- नहीं हुजूर ! अब मुझे पैसे नहीं चाहिए और शर्त के मुताबिक समय पर पैसे न लौटाने पर मुझे अब नेकीराम के जिस्म का एक शेर मॉस चाहिए |


अकबर :- तुम इतने जिद्दी क्यों बन रहे हो पैसे लौटने में सिर्फ एक दिन की ही तो देरी हुई है |
बद्रीराम :- हुजूर ये बात है वादा करके उसे निभाने की, लेकिन क्योकि में आपने सामने खड़ा हूँ इसीलिए में आपकी बात मान लेता हूँ, लेकिन अगर ये अपना व्यापार बंद करके ओर ये शहर छोड़ दे तो में उसका एक शेर मॉस नहीं लूंगा |


नेकीराम :- हुजूर ये शहर मेरा घर है, ओर में ये शहर छोड़ा कर कहाँ जाऊंगा, ये मुझसे कैसे होगा ?
कमल :- मित्र क्योकि ये सब मेरे वजह से हुआ हे, तुम मेरे साथ जयपुर चलो और मेरे साथ घर पर रहना |
अकबर :- ठहरो ! मुझे समझ में नहीं आता की तुम इतने जिद्दी क्यों हो, ये अपने पैसे वापस लो और ये मसला अभी इसी वक्त खत्म करो |
बद्रीराम :- हुजूर आप महाराज है आपका हुकुम तो मानना ही होगा, लेकिन इसका मतलब ये होगा की व्यापार में किये गये वादे की कोई कीमत नहीं है, लेकिन फिर भी आप यही चाहते हे तो ?
बीरबल :- हुजूर तुम नेकीराम के जिस्म का एक शेर मॉस काट सकते हो अगर ये ही तुम्हारी ज़िद है तो, सिपाही इन्हे अपनी तलवार दो |


तभी सिपाही बद्रीराम के हाथ में तलवार देकर कहते हे जाइये शौक से अपने वादे के मुताबिक नेकीराम के जिस्म से एक शेर मॉस काट लीजिये |
और बद्रीराम तलवार लेकर आगे बढ़ता है नेकीराम की ओर – औऱ जैसे ही मॉस काटने के लिए तलवार उठाता है तभी बीरबल कहता हे रूको याद रहे वादे के मुताबिक तुमने एक सेर मॉस की ही मांग की है | लेकिन अगर तुम एक बूंद भी खून बहाओगे तो तुम्हे अपना खून देना पड़ेगा |
बद्रीराम सोच में पड़ जाता है ओर कहता है, लेकिन ये कैसे हो सकता हैं ?
अकबर :- हां हआ हआ हआ हसते हुए |


बिरबल :- ये कैसे करना हे ये तुहारी समस्या है वादे के मुताबिक़ तुहे सिर्फ एक शेर मॉस ही काटना है, लेकिन खून नहीं बहा सकते अगर आप से बन सके तो फिर आगे बढ़ो |
बद्रीराम :- में मुझसे ये नहीं होगा |
बिरबल :- हुजुर ये आदमी वादे के मुताबिक अपनें हक को छोड़ रहा है |
अकबर :- तुम एक ज़ालिम इंसान हो,औऱ तुम्हारे इरादे भी साफ़ नजर आते है, तुम बस नेकीराम को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे क्योकि वो तुम्हारे ही व्यापार में है |


बद्रीराम :- में माफ़ी चाहता हूँ हुजूर मुझे माफ़ कीजिये |
अकबर :- तुम्हे माफ़ी नहीं मिल सकती है मुझे ये भी पता चला है की तुम काफी लोगो के साथ बेईमानी कर चुके हो इसीलिए तुम्हे एक साल की कैद की सजा सुनाई जाती है ओर नेकीराम को जो रकम तुमने दी हे वो हम नेकीराम को देते है | सिपाहियों इसे कालकोठरी में डाल दो |
सिपाही बद्रीराम को ले जाते हे |


नेकीराम :- शुक्रिया जहाँपनाह, शुक्रिया बीरबल जी |
अकबर :- बीरबल एक बार फिर तुमने अपनी चतुराई से इन्साफ को जीत दिलाई, शाबास ! शाबास ! बिरबल
बिरबल :- शुक्रिया हुजूर |
पूरी सभा कहती है बीरबल जिन्दाबाद, महाराज अकबर जिन्दाबाद |

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