UA-155293559-1Akbar Birbal Story In Hindi [अकबर बिरबल की कहानियाँ hindi ]

Akbar Birbal Story In Hindi [अकबर बिरबल की कहानियाँ hindi ]

दुस्ट काजी

Akbar Birbal Story in Hindi

एक बार महाराज अकबर के दरबार में खान नाम का एक गरीब आदमी आता है |और अकबर को प्रणाम करता हैं |


अकबर :- बोलो कौन हो तुम ? और हमसे क्या चाहते हो ? महाराज मेरा नाम खान है और में एक किसान हूँ |


अकबर :- अच्छा है आगे बोलो |
महाराज में थोड़े से पैसे कमाकर सीधी साधी जिंदगी जी रहा था |पहले में अपने परिवार के साथ ख़ुशी से रह रहा था, पर अब मेरी पत्नी चल बसी | बीवी के गुजर जाने के बाद में बिलकुल मायूस हो गया था |क्या करू कुछ समझ में नहीं आ रहा था | मेरी कोई औलाद भी नहीं है, इसीसलिए में अकेला महसूस करने लगा था, और एक दिन काजी साब मुझे मिले और मुझसे पूछा खान तुम इतने दुखी और मायूस क्यों लग रहे हो ?

मेने कहा – आप तो जानते है काजी साब कुछ दिन पहले मेरी बीवी चल बसी और अब मेंरे पास जीने की कोई वजह नहीं हैं|


काजी साब :- अरे नहीं – नहीं तुम्हे ऐसा नहीं सोचना चाहिए | तुम्हे इस तरह मायूस नहीं होना चाहिए ,तुमने साड़ी जिंदगी मेहनत की है, क्यों न तुम कुछ दिनों के लिए अजमेर चेले जाओ | खुदा की फजल से तुमको जीने के नया मकसद मिलेगा |

मेने कहा जी काजी साब आप ठीक कहते है , मुझे ये करना चाहिए में अजमेर चला जाऊंगा और अल्लाह के दरबार से मुझे जीने का मकसद मिलेगा ! मेने काजी साब का सुक्रिया किया और में घर आ गया और अगले दिन अजमेर जाने की तैयारी करने लगा | और उस रात मुझे ख़याल आया की में अपने जीवन भर की जमा पूंजी को कहा छोड़ा कर जाऊंगा |

पैसो के लिए में किस पर भरोसा कर सकता हु | फिर मुझे काजी साब का ख्याल आया और मेने सोचा की काजी साब पर भरोसा कर सकता हु और अगले दिन में काजी साब के घर गया और उनसे मेरे लोट के आने तक अपने सोने के सिक्को अपने पास रखने की दरखास्त की |

उन्होंने कहा ठीक है खान तुम्हारे आने तक थैला मेरे पास रहेगा, लेकिन पहले इस पर मोहरबंद लगा दो ताकि तुम्हे विश्वास रहे की इस थैले को किसी ने नहीं खोला और फिर मेने उस थैले पर उनके सामने ही मोहरबंद कर दिया और वो थैला उन्होंने अपने पास रख लिया | और फिर में अजमेर चला गया


फिर में अजमेर से ये सोच कर वापस आ रहा था की अपने आस – पास के बच्चो को अल्लाह पर इबादत करना सिखाऊंगा और बाकीबचे पैसे से अपने जिंदगी गुजार लूंगा |और ये सोचकर में वापस आ गया और काजी साब से मिला और मेने कहा काजी साब मुझे अजमेर जाकर बहुत ख़ुशी मिली और अब मेने सोचा है की अपने बाकी बची जिंदगी बच्चो को धरम और तालीम देने का फैसला किया है |अब आप मुझे मेरे सिक्के लोटा दीजिये ताकि में जा सकू | और उन्होंने मुझे पैसे की थैली दी और कहा ! ये लो मेने तुम्हारे पैसे को हिफाजत से रखा है जरा जाँच लो की मोहर ठीक है न ? मेने सुक्रिया किया और कहा जी काजी साब मेरे पैसो की देखभाल करने के लिए |

और मोहर वैसे ही हे, आपका सुक्रिया और में अपने घर चला आया और घर जाकर मेने वो थैली खोली और देखा की उसमे पत्थर भरे हुए है !आमीन – सोचा की ये कैसे हो सकता हे, मेरे सोने के सिक्के कहा गए और फिर में वापस काजी साब के पास गया और काजी साब ने कहा क्या हुआ खान ? बच्चो को पढ़ाने में मेरी सलाह चाहिए | मेने नहीं काजी साब | फिर उन्होंने कहा – फिर कैसे आना हुआ ? मेने कहा काजी साब घर जाकर जब उस पैसो का थैला खोला तो उसमे सिक्के जी जगह कुछ पत्थर देखे और उस पत्थर देखकर मेरे होश उड़ गए |


काजी साब ने कहा – क्या मतलब हे तुम्हारा? क्या मेरे पास पैसे रखने से पहले वो सिक्का खोलकर दिखाया था ? क्या तुमने मोहर अपने आप नहीं लगाई थी ? फिर मेरे पास आकर ऐसा कहने की हिम्मत कैसे हुई, चले जाओ, दूर हो जाओ मेरी नजर से | मेने कहा काजी साब मेरे साथ ऐसा मत कीजिये | मेरी जिंदगी भर की कमाई है, में उन पैसे के बिना अपना बुढ़ापा कैसे गुजारूंगा ?

काजी साब :- तुम मुझ पर चोरी का इल्जाम लगा रहे हो ? सुना नहीं तुमने चले जाओ यहाँ से नहीं तो मुझ पर झूठा इल्जाम लगाने के जुल्म में गिरफ्तार करवा दूंगा, निकल जाओ यहाँ से |

खान :- और में वहा से चला गया |
खान कहता है महाराज ! आप के पास आने के अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं था, हुजूर आप ही मेरे पैसे दिला सकते है काजी साब से ,आप ही दिला सकते हे महाराज |


अकबर :- बिरबल तुम क्या सोचते हो क्या तुम इस मामले में सच का पता लगा सकते हो ?
बिरबल :- हुजूर में कुछ और जानना चाहूंगा | क्या तुम्हारे पास वो थैला है ? खान वो थैला बिरबल को दीखाता है |थैला देखकर बीरबल कहता है हुजूर मुझे सच जानने के लिए दो दिन का वक्त दीजिये |


अकबर :- ठीक है बिरबल | इस दो दिन तक खान तुम हमारे मेहमां बन कर रह सकते हो, लेकिन हमें पता चला की तुम झूठे हो तो तुम्हे बंदीगृह में डाल दिया जायेगा |
खान :- जी हुजूर में जवान देता हु, मेने सिर्फ सच ही कहा है |

बिरबल अपने घर जाते है और अपनी पोशाक को थोड़ा सा फाड़ देते है और सेवक राम को कहते है, ये मेरी पसंदीदा पोशाक में से एक है, थोड़ी से फट गयी है | तुम शहर के सबसे अच्छे दरजी का पता लगा सकते हो जो इसका रफू कर सके और ये पोशाक सिल भी जाये और सिलाई भी नहीं दिखे|
सेवक राम :- बिलकुल जनाब में अभी बाजार जाकर पता लगाऊंगा और में जरूर किसी अच्छे दरजी को ढूंढ लूंगा जो ये काम कर सके |


बिरबल :- नहीं सेवक राम मुझे अच्छा नहीं सबसे अच्छा चाहिए | तुम इस शहर के सबसे अच्छे दरजी का पता लगाओ |
बिरबल की पोसाक लेकर सेवक राम चला जाता हे | थोड़ी देर बाद सेवक राम बिरबल की पोशाक को सिल्वाकर ले आता है |


बिरबल :- हूँ बिलकुल ! बहुत बढ़िया पता नहीं चल रहा हे ही ये पहले फटी हुई थी |और रफू भी कमाल का किया है , कोई आसानी से पता नहीं लगा सकता है |बताओ ये काम किसने किया है ?
राम :- जनाब गोपाल नाम का एक दरजी है, उसी ने ये काम किया है, मेने जिन से भी पूछा की सबसे अच्छा दरजी कौन है ? सब ने उसी का नाम बताया |
बिरबल :- बहुत खूब तुम उस से कहो की मुझ से आकर मिले | मुझे और कपड़ो की रफू करानी है |

अगले दिन राजदरबार में भरी सभा में अकबर ने बिरबल से पूछा की बिरबल क्या तुमने खान के मामले में सच का पता लगा लिया या और कुछ समय चाहिए
बिरबल :- हुजूर मेने सच का पता लगा लिया है आप खान और काजी साब को यहाँ बुला लीजिये में सारी सच्चाई आपके सामने रख दूंगा |अकबर ने कहा जरूर बिरबल – सिपाहियों काजी साब और खान को राजदरबार में बुलाया जाये | फिर बिरबल सवाल पूछने लग जाते है |
बिरबल :- खान क्या ये वही थैला है, जो तुमने काजी साब के पास रखवाया था
खान :- जी हुजूर ! ये मेरे ही थैला है|


बिरबल :- काजी साब क्या आप इस थैले को पहचानते है |
काजी साब :- हां बीरबल वैसा ही थैला लगता है |और ये मोहर बेशक अभी खुली है पर इसी ने इस पर वो मोहर लगाई और वापस लेने से पहले मोहर को जाँच भी किया था |तब ये मोहर खुली नहीं थी | थैले में क्या था ? मेने देखा तक नहीं,और ये कहता है की सोने के सिक्के थे | में कैसे यकींन कर लू हुजूर ! ये झूठ भी तो बोल सकता है |


बिरबल :- गोपाल दरजी को जल्द बुलाया जाये |
सिपाही :- गोपाल दरजी दरबार में पेश हो |
काजी उसे देखता है और अकबर भी उसे देखते है |
बिरबल :- हमे बताओ गोपाल ! हाल ही में तुमने काजी का कोई काम किया है
गोपाल :- जी जहापनाह काजी साब ने मुझसे अपना पैसे वाला थैला रफू करवाया था |


बिरबल :- हुजूर काजी को सजा मिलनी चाहिए | क्योकि उसने खान के थैले को काटकर उसमे से सिक्के निकाल लिए |और उसमे पत्थर भर दिए और गोपाल से रफू करने को कहा | झूठा और धोकेबाज हे ये काजी |
काजी :- महाराज मुझे माफ़ कर दीजिये में लालची हो गया , दुबारा में ये गलती नहीं करूँगा इस बार मुझे माफ़ कर दीजिये
अकबर :- इतने बड़े औधे पर रह कर तुम ऐसी घटिया हरकत कैसे कर सकते हो, लोग तुमसे सलाह और मदद की उम्मीद रकते है और धोकेबाजी करते हो तुम्हे माफ़ नहीं किया जा सकता | हम तुम्हे एक साल कैद की सजा देते है | सिपाहियों बंद कर दो इसे कैद खाने में |
सिपाही उसे ले जाते है |


अकबर :- फ़िक्र मत करो खान ! तुम्हे तुम्हारे पैसे वापस मिल जायेंगे और तुम्हारे नेक काम में तुम्हारी मदद हम करेंगे और तुम्हारे के लिए एक मदरसा बनवा देंगे जहा तुम बच्चे को तालीम दे सको |जाओ खुदा तुहारी खैर करे |


खान :- सुक्रिया महाराज, सुक्रिया बिरबल महाराज |और खान वहा से चला जाता है |
अकबर :- बिरबल एक बार फिर तुम्हारी सोच और समझदारी ने एक चोर और धोकेबाज को पकड़ा | पर एक बात बताओ बिरबल ! तुम्हे काजी की करतूत पर शक कैसे हुआ ?


बिरबल :- हुजूर जब मेने खान को ये कहते हुए सुना की जब काजी ने उसे मोहरबंद कर उसे जांचने के लिए कहा तभी में समझ गया की पैसे किसी और चालाकी से निकाल लिए गए है, इसीसलिए मेने थैले को ध्यान से जाँच किया और सिलाई देखी |अब सिर्फ मुझे शहर के सबसे अच्छे दरजी का पता लगाने की देर थी हुजूर |


अकबर :- शाबास बिरबल ! एक बार फिर से तुमने एक मिसाल कायम की है
बिरबल :- जी सुक्रिया हुजूर सुक्रिया |

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