UA-155293559-1Akbar birbal story (Akbar birbal ke 100 se jyada kahani hindi Me)

Akbar birbal story (Akbar birbal ke 100 se jyada kahani hindi Me)

1. पति को सबक सिखाया बीरबल ने

Akbar Birbal Story

दिल्ली शहर में तर्कमल नाम का एक गुस्से वाला आदमी रहता था, गुस्सा होने पर वह क्या करेगा किसी को मालूम नहीं था, ऐसे ही एक दिन तर्कमल को पत्नी पर गुस्सा आ गया और तर्कमल कहने लगा,
तर्कमल :- ये कैसा खाना बनाया हे रज्जो, सब्जी में इतना नमक क्यों दाल दिया मुझे मार डालेगी क्या,


रज्जो :- रुकिए में सब्जी और आपके लिए दाल देती हु ,
तर्कमल :- रोटी तो बिलकुल ही लकड़ी जैसी है, मेरी दाँत तोड़ेगी क्या पता नहीं कहा से तू मुझे मिली है , कितनी बार कहा है की मुझे सब्ज़ी में और कुछ नहीं पसंद नहीं है ये सब्जी में बाल कहा से आया क्या में तेरा बाल खाऊंगा,


रज्जो :- माफ़ करो जी गलती हो गयी अब नहीं होगी पत्नी को इतना धमकाने के बाद भी तर्कमल चुप नहीं हुआ
अगले दिन तर्कमल फिर से खाना खाने के लिए बैठ गया और देखा की फिर से सब्ज़ी में बाल गिरा हुआ है|


तर्कमल :- जा नाइ को बुला के ला में तेरे बाल को ही कटवा देता हु,
रज्जो :- मुझे माफ़ कर दो फिर से नहीं होगी ये गलती,
तर्कमल :- जा बुला कर ला नहीं तो घर में मत आना,
रज्जो :- यह कहकर रज्जो नाई के पास जाती है और सारी कहनी कह देती है,

नाई :- सारी बाते सुनकर नाई कहता है की तुम्हारे पति को समझाना मेरे बस की बात नहीं है, ऐक काम करते है हम बीरबल के पास जाते है वो इस समस्या का समाधान जरूर करेगा दोनो बीरबल के पास जाते है और सारी बात बीरबल को बता देते है,


बीरबल :- अब जैसा में बताऊ वैसा ही करना फिर देखो कैसे तुम्हारा पति शांत होता है, बीरबल नाई के कानों में कुछ कहता है, और वे दोनों वहां से चले जाते है,


नाई :- तर्कमल जी चलिये, जल्दी चलिये मेरे साथ,
तर्कमल :- अरे नाई तू आया है ,और रज्जो कहा हैं,
नाई :- उसे नहाने के लिए भेजा है, नहाने के बाद ही बाल अच्छे से काट सकेंगे


तर्कमल :- ये बहुत अच्छा किया तुमने
नाई :- तो आप भी एक काम कीजिये ये जहर लीजिये, और जल्दी से पी जाइये
तर्कमल :- जहर मुझे को पिला रहे हो, तुम्हारा दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया है,
नाई :- आपको पीना ही होगा ,आपके पत्नी के बाल जो काटने है,
तर्कमल :- तो,
नाई :- तो आपके मरे बिना में ऐसा कैसे कर सकता हु, धर्म के अनुसार पति के मरने के बाद ही पत्नी के बाल कटे जाते है, जल्दी कीजिये मैने चार लोगो को कन्धा देने के लिए बुलाया है, वहां समसान में चिता भी तैयार होगी, सभी को बता दिया है, जल्दी कीजिए सब आपका इन्तजार कर रहें है, जल्दी से जहर पीजिये|


तर्कमल :- नहीं में नहीं पी सकता,
नाई :- आपको पीना ही पड़ेगा ख़ास बीरबल ने यह जहर आपके लिए भेजा है, आप ही तो अपनी पत्नी को इतनी बड़ी सजा दे रहे थे तर्कमल जी


तर्कमल :- आपने तो मेरे आँख ही खोल दी, आप की बात बिलकुल सच है, भूल हो गयी, माफ़ कर दीजिए,


नाई :- अरे भाई में कौन होता हूँ आपकी आँखे खोलने वाला ये काम तो चतुर बीरबल जी का है| हां हां हां हां…….

दिये की गरमी

Akbar Birbal Story

ऐक दिन सर्दी में रात को बादशाह अकबर और उसका चतुर मंत्री बिरबल बाग में सैर कर रहें थे तभी अकबर के मन में ख्याल आया और बिरबल से पूछा, बिरबल कितनी तेज सर्दी पड़ी हैं तुम्हे क्या लगता हैं इस कड़ाके की सर्दी में कोई पूरी रात खड़ा रह सकता हैं

बिरबल :- बिलकुल नहीं महाराज पर अगर इनाम रखा जाए तो शायद कोई लालच में खड़ा रहने के लिए तैयार भी हो सकता हैं

अकबर :- तो क्या तुम कोई ऐसे आदमी को ला सकते हो, जो पूरी रात पानी में खड़ा रह सके

बिरबल :- ठीक हैं महाराज में कोशिस करता हूँ, दूसरे दिन बिरबल ने अपने ऐक गरीब पड़ोसी को अपने घर बुलाया और कहा की तुम पूरी रात ठन्डे पाने में खड़े रह सकते हो अगर तुम रह सकते हो तो महाराज से तुम्हे बहुत बड़ा इनाम मिलेगा

गरीब आदमी:- क्यों नहीं में रह सकता हूँ महाराज,
और वह आदमी पूरी रात पानी में खड़ा रहा, महाराज ने दो सिपाही को वहीं पर उसकी निगरानी करने के लिए खड़ा किया था|


दूसरे दिन सुबह जब महाराज उस आदमी से मिलने आये और कहा कमाल हैं तुम पूरी रात कैसे इस सर्दी में खड़े रह सके,

गरीब आदमी :- महाराज आपकी महल के दिए की रोशनी यहाँ आ रही थी उस रोशनी को देख़ते देखते में पूरी रात खड़ा रहा |

अकबर :- इसका मतलब यह हैं की महल के दिये की गरमी के कारण तुम रात भर इस पानी में खड़े रह सके | नहीं तुम्हे कोई इनाम नहीं मिलेगा

बेचारा गरीब आदमी वहां से निराश हो कर चले गया |

जब बिरबल को पता चला तो बिरबल ने प्रण किया की उस गरीब को उसका इनाम मिलना ही चाहिए
अगले दिन महाराज अपने भोजन का इन्तजार कर रहे थे, पर भोजन का कोई पता ही नहीं था
हकीकत जानने के लिए महाराज रसोई घर में गए और देखे की बर्तन आग से बहुत ज़्यादा ऊंचाई पर था

महाराज बोले ये तो मूर्खता हैं इतना ऊपर अगर बर्तन रखोगे तो भोजन कैसे पकेगा

बीरबल क्यों नहीं पकेगा महाराज अगर ठन्डे पानी में खड़े आदमी को दूर महल के दिये की गर्मी मिल सकती हैं तो ये बर्तन तो आग से कुछ ही दुरी पर हैं तो इसमें खाना क्यों नहीं पक सकता हैं, महाराज ?

महाराज को अपनी गलती का एहसास हुआ, और उन्होंने उस गरीब आदमी को बुला कर उसका इनाम उसे दे दिया |

मूर्खो की दावत

Akbar Birbal Story

अकबर :- बिरबल मेरे मन में ऐक ख्याल आया हैं, मैं अपने राज्य के 4 मूर्खो को दावत देना चाहता हूँ, जाओ 4 मूर्ख को ढूंढ कर लाओ |

बिरबल सोचने लगा की 4 मूर्खो को कैसे ढूंढा जाये तभी बिरबल ने देखा की ऐक आदमी गधे पर बैठ कर लकड़ी के बंडल को अपने सर पर लाद कर जा रहा था,
बिरबल :- अरे भाई ये बंडल अपने सिर पर क्यों उठा रखा हैं, तुम इसे गधे पर भी रख सकते हो

मूर्ख आदमी :- अरे हां में जानता हूँ, अगर मै इस बोझ को गधे पर रखूंगा तो ये गधा मर भी सकता हैं इसीलिए इसे मैने अपने सिर पर रखा हैं

बीरबल :- अरे वाह यही हैं, जिसे महाराज को जरूरत हैं, चलो इसे महाराज के पास ले जाता हूँ, कुछ दूर चलने के बाद बीरबल को ऐक आदमी कुछ ढूंढ़ते हुए नजर आया

बिरबल :- सुनो क्या ढूंढ रहें हो
मूर्ख आदमी :- अंगुठी ढूंढ रहा हूँ
बिरबल :- कहा गिरी हैं अंगूठी
मूर्ख aadmi :- घर के पास
बिरबल :- तो तुम यहाँ क्यों ढूंढ रहें हो
मूर्ख आदमी :- क्योकि घर के पास अंधेरा हैं इसीलिए यहाँ ढूंढ रहा हूँ

दूसरे दिन महाराज बिरबल से कहते हैं , यहाँ तो सिर्फ दो ही मुर्ख हैं बाकी कहाँ हैं,

बिरबल :- माफ़ कीजिए महाराज बाकी 2 मुर्ख यही हैं और वो हम दोनों हैं
अकबर :- हम दोनों कैसे
बिरबल :- क्या आप अपनी प्रजा की हित में इतने सारे काम छोड़कर मुर्ख को ढूंढने की कोशिस कर रहें हैं और में उन मुर्ख को ढूंढने के लिए बाहर निकला हूँ और आपका साथ दे रहा हूँ |

बिरबल :- हां हां हां ……………

इस तरह से महाराज को अपनी ग़लती का अहसास हुआ |

छोटी रेखा

Akbar Birbal Story

ऐक दिन अकबर ने दरबार में ऐक विचित्र प्रशन पूछा, उन्होंने जमीन पर कलम से ऐक रेखा खींच दी,
और बोले इस रेखा को हाथ लगाए बिना छोटा कैसे कर सकते हैं, वहां पर बैठे सभी मंत्री सोचने लगे की आज महाराज को क्या हो गया हैं|

उसी समय बिरबल वहां आये और बोले महाराज मै ये कर सकता हूँ,
अकबर :- ठीक हैं बिरबल अब तुम इस रेखा को छोटा कर के दिखाओ,

बिरबल ने महाराज के रेखा के समीप उससे ऐक और लम्बी रेखा खींची और फिर कहा देखा महाराज आपकी रेखा छोटी हो गयी हैं |

अकबर :- वाह बहुत अच्छे बिरबल तुहारी बुद्धिमानी पर मुझे नाज़ हैं |

जो होता हैं भले के लिए होता हैं

Akbar Birbal Story

ऐक दिन आम काटते समय महाराज की अंगुली कट गयी,
आ…. आ…आ…..आ ……आ ……

तभी बिरबल वहां आता हैं और महाराज अपनी परेशानी उसे बताते हैं,

बिरबल कहता हैं महाराज जो होता हैं वो भले के लिए होता हैं,
यह बात सुनकर अकबर को गुस्सा आ जाता हैं और वो सेनिको को आदेश देते हैं की इसे बंदीगृह में दाल दो, बंदीगृह में जाने के बाद बीरबल फिर से यही कहता हैं की जो होता हैं वो भले के लिए ही होता हैं,

अगले दिन महाराज शिकार के लिए जंगल मै गए, और जंगल में महाराज रास्ता भूल गए और भटकते भटकते ऐक खुंखार आदिवासी इलाके में प्रवेश किया वहां के लोगो ने महाराज को बंदी बना लिया और कहाँ उसे ले कर आओ उसकी बलि हम देवता को चढ़एंगे, उन सभी ने महाराज को पकड़कर ऐक पेड से बांध दिया,

तभी ऐक आदवासी ने बलि चढ़ने से पहले उसके अंग को जांच परख करने की सोची तभी उन्होंने देखा की महराज की ऐक ऊँगली कटी हुई हैं इसकी बलि ईश्वर को मंजूर नहीं होगा, इसे जाने दो, छोड़ दो और उन्होंने महाराज की ऊँगली कटी होने के कारण छोड़ दिया

अब महाराज की आंख खुल गई की बीरबल ने ठीक ही कहा था, की जो होता हैं वह अच्छे के लिए होता हैं,

अपने महल आते ही महाराज अकबर ने बिरबल को बंदीगृह से छुड़ाने की आज्ञा दी

अकबर :- बिरबल जब तुम्हे बंदीगृह में डाल दिया गया तभी भी तुमने यही कहा की जो होता हैं वह अच्छे के लिए होता हैं पर यह कैसे बिरबल,

बिरबल :- महाराज अगर आप मुझे बंदीगृह में नहीं डालते तो में आपके साथ होता और आदवासी ने आप को छोड़के मुझे बलि चढ़ाया होता|

तुहारे कहना सही हैं बिरबल जो होता हैं भले के लिए होता हैं |

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